दुख हमारा प्रिय सखा

दुख हमारा प्रिय सखा



 


जिसने हमें स्वयं से मिलाया,
जिसने हमें बताया हम क्या है?
कौन हैं-------?


जो हमें जीवन की परिभाषा सिखा रहा था,,,,
कभी मौन चित्त होकर,,,,
कभी आंसुओं में बहकर------


जो सिखा रहा था हमें----
हर एक अन्न के दाने की कीमत-----
और सच्चे झूठे रिस्तों की अहमियत------


जो उठा रहा था,
नकाब आस्तीन के साँपों का,,,,
हमारे जीवन से जिसने,,,,,
वो नकाबी फेंक दिए,,,
जो हमारे काबिल न थे----
वो हमारा प्रिय सखा,
और हमारा हितैषी दुःख था


जिस शब्द को सुनकर हमारी नादानियाँ सहम जाती थी-----
जिसके बिना जीवन के अनुभव अधूरे रह जाते हैं----


भले ही उम्र से कोई बूढा हो जाये---
दुःख जिसका मित्र बनकर न आया,,,,
उसके अनुभव अधूरे रह जाते हैं----


हाँ वह दुःख ही तो था----
जिसने हमें अहंकारी बनने से रोका,,,,
सुख का क्या----अपरिपक्व है,
अज्ञानी है-----


जिसने हमें सिखाया,,,,
दर्द की चीत्कार पर विजय पाना,
और जीवन के हर बवंडर से टकराना-----


जिसने निखारा हमारे स्वाभिमान को,,,,,
हर हाल में अडिग, अचल सा बनाने वाला-----
मुझे स्वयं को स्वयं से मिलाने वाला-----
हमारा प्रिय सखा दुःख था-----


हे मित्र यदि तुम न होते-----
तो हम अनाड़ी रह जाते-----
जीवन के हर क्षेत्र में------
और हम अनुभवहीन,,
कौरव साबित होते----
जीवन के कुरुक्षेत्र में------


ये जीवन पथ----?
कहीं दलदल तो कहीं अग्निपथ भी है------
इसे पार करके जब,
राही को मीठा पानी मिले------
तो वह उसे अमृत समझ कर,,,
बूँद-बूँद संजोयेगा------


हर बूँद की कीमत समझाने वाले,
हे प्रिय मित्र-------
अब हमें संजोना है हरपल,
स्वयं को, स्वयं से----
आप हमारे अन्तर्मन के सुख का कारण हो??????


तुम मुझतक आये यह मेरा सौभग्य है------
अब मुझे तुमसे डर नहीं लगता,
तुम अपने से लगते हो-----
तुम पवित्र हो,
मन से, वचन से, कर्म से-----✍🏻